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 Rajasthan देवी देवता GK


राजस्थान लोक देवता एवं देवियाँ 

मारवाड़ के पंच वीर –   1. रामदेवजी               2. पाबूजी            3. हड़बूजी                     4. मेहाजी मांगलिया               5. गोगाजी

रामदेवजी
उपनाम – रामसापीर, रूणेचा के धणी, बाबा रामदेव
जन्म – उडूकासमीर (बाड़मेर), 1405 ई.
 रामदेव जी तवंर वंशीय राजपूत थे।
पिता – अजमाल जी तँवर (रूणेचा के ठाकुर)
माता – मैणादे
पत्नी – नेतलदे
घोड़े का नाम – लीला इसीलिए इन्हें लाली रा असवार कहते हैं।
गुरू – बालीनाथ या बालकनाथ
विशेषताएँ – भैरव नामक राक्षस को मारा तथा पोकरण कस्बे को बसाया, कामडिया पंथ की स्थापना की, अछूत मेघवाल जाति की डालीबाई को बहिन माना, मुस्लिम रामसापीर की तरह पूजते हैं।
रामदेव जी का प्रतीक चिन्ह पगल्ये कहलाते है।
नेजा – रामदेवजी के मन्दिर की पंचरंगी ध्वजा।
जम्मा – रामदेवजी का जागरण।
चैबीस बाणियाँ – रामदेवजी की रचना।
रिखिया – रामदेवजी के मेघवाल भक्त।
इनके लोकगाथा गीत ब्यावले कहलाते हैं
रूणेचा में रामदेवजी की समाधि पर प्रतिवर्ष भाद्र पद शुक्ला द्वितीया से एकादशी तक विशाल मेला भरता है। यह राजस्थान में साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। यहाँ कामड़ जाति की महिलाएँ तेरहताली का नृत्य करती है।
रामदेवजी के प्रमुख मन्दिर –
रामदेवरा – जैसलमेर
बराडियाँ खुर्द – अजमेर
सुरताखेड़ा – चित्तौड़गढ
छोटा रामदेवरा – गुजरात
 पाबूजी –
जन्म – कोलू (फलौरी, जोधपुर)
पिता का नाम – धांधलजी राठौड़
माता का नाम – कमलादे
पत्नी – सुप्यारदे
घोड़ी – केसर – कलमी
पाबू प्रकाश की रचना मोड़शी आशियां ने की।
लक्ष्मण का अवतार माने जाते हैं। देवल चारणी की गायों को छुड़ाने हेतु बहनोई जीदराव खींची से युद्ध किया। ऊँटों के देवता, प्लेग रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते हैं। भाला लिए अश्वारोही के रूप में पूज्य/प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को कोलू में मेला भरता है। इनकी फड़ का वाचन भील जाति के नायक भोपे करते हैं|
3. गोगाजी
उपनाम – सापो के देवता, गोगा चव्हाण, गोगा बप्पा।
जन्म – ददरेवा (चूरू) में चौहान वंश में।
पिता – जेवर सिंह चौहान
माता – बादल दे।
पत्नी – केमलदे
-गोगा जी समाधि गोगामेड़ी, नोहर तहसील (हनुमानगढ) में है।
 -शीर्ष मेडी (ददेरवा) तथा घुरमेडी-(गोगामेडी), नोहर मे इनके प्रमुख स्थल हैं।
-गोगा मेंडी का निर्माण “फिरोज शाह तुगलक” ने करवाया।
-वर्तमान स्वरूप (पुनः निर्माण) महाराजा गंगा सिंह नें कारवाया।
-गोगाजी का विशाल मेला भाद्र कृष्णा नवमी (गोगा नवमी) को गोगामेड़ी गाँव में भरता है।
-इस मेले के साथ-साथ राज्य स्तरीय पशु मेला भी आयोजित होता है।
-यह पशु मेला राज्य का सबसे लम्बी अवधि तक चलने वाला पशु मेला है।
-गोगा मेडी का आकार मकबरेनुमा हैं।
-गोगाजी की ओल्डी सांचैर (जालौर) में है।
-इनके थान खेजड़ी वृक्ष के नीचे होते है।
-गोरखनाथ जी इनके गुरू थे।
-गोगाजी हिन्दू तथा मुसलमान दोनों धर्मो में समान रूप से लोकप्रिय थे।
-धुरमेडी के मुख्य द्वार पर बिस्मिल्लाह अंकित है।
-इनके लोकगाथा गीतों में डेरू नामक वाद्य यंत्र बजाया जाता है।
-किसान खेत में बुआई करने से पहले गोगा जी के नाम से राखड़ी हल तथा हाली दोनों को बांधते है।

4  हड़बूजी – हरभू 

 भूंडेल (नागौर) शासक मेहाजी साँखला के पुत्र थे।
रामदेवी जी के मौसेरे भाई थे।
राव जोधा के समकालीन थे। 
बेगटी गाँव (फलौदी, जोधपुर) में इनका प्रमुख मंदिर है जहाँ इनकी गाड़ी की पूजा की जाती है। 
पुजारी – साँखला राजपूत
गुरू – बालीनाथ (बालकनाथ)
शकुन शास्त्र के ज्ञाता थे।
 मेहाजी मांगलिया – 
मांगलिया राजपूतों के इष्ट देव।
प्रमुख   मंदिर– बापणी (ओसियाँ, जोधपुर) यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (जन्माष्टमी) को मेला भरता है।
घोडा – किरड़ काबरा।
जैसलमेर के राणंग देव भाटी से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त।
इनकी पूजा करने वाले भोपों की वंश वृद्धि नहीं होती है। अत: वे वंश की वृद्धि गोद लेकर करते हैं।
तेजाजी –
 उपनाम – परम गौ रक्षक एवं गायों के मुक्तिदाता कृषि कार्यो के उपकारक देवता, काला एवं बाला के देवता।
जन्म – खड़नाल (नागौर), जाट समुदाय में (नाग वंशीय)
पिता – ताहड़ जी जाट
माता – राजकुँवर
पत्नी – पेमल दे
-जाट वंश में जन्म हुआ। जन्म तिथि- माघ शुक्ला चतुर्दशी वि.स. 1130 को।
-तेजाजी का विवाह पनेर नरेश रामचन्‍द की पुत्री पैमल से हुआ था
-कार्यक्षेत्र हाडौती क्षेत्र रहा है।
-तेजाजी अजमेर क्षेत्र में लोकप्रिय है।
-इन्हें जाटों का अराध्य देव कहते है।
-उपनाम – कृषि कार्यो का उपकारक देवता, गायों का मुक्ति दाता, काला व बाला का देवता।
-अजमेर में इनको धोलियावीर के नाम से जानते है।
-इनके पुजारी घोडला कहलाते है।
-इनकी घोडी का नाम लीलण (सिंणगारी) था।
-परबत सर (नागौर) में ” भाद्र शुक्ल दशमी ” को इनका मेला आयोजित होता है।
-भाद्र शुक्ल दशमी को तेजा दशमी भी कहते है।
-सैदरिया- यहां तेजाजी का नाग देवता ने डसा था।
-सुरसरा (किशनगढ़ अजमेर) यहां तेजाजी वीर गति को प्राप्त हुए।
-तेजाजी के मेले के साथ-साथ राज्य स्तरीय वीरतेजाजी पशु मेला आयोजित होता है।
-इस मेले से राज्य सरकार को सर्वाधिक आय प्राप्त होती है।
-लाछां गुजरी की गायों को मेर के मीणाओं से छुडाने के लिए संघर्ष किया व वीर गति को प्राप्त हुए।
-प्रतीक चिन्ह – हाथ में तलवार लिए अश्वारोही।
-अन्य – पुमुख स्थल – ब्यावर, सैन्दरिया, भावन्ता, सुरसरा।
 देवनारायणजी – 
उपनाम – देवजी, ऊदल जी, चमत्कारी लोक पुरूष
जन्म का नाम – उदय सिंह
जन्म – गोठाँ दड़ावताँ (आसीन्द, भीलवाड़ा)
पिता – सवार्इ भोज (नागवंशीय गुर्जर बगड़ावत)
माता – सेडू खटाणी।
पत्नी – पीपलदे। राजा जयसिंह(मध्यप्रदेष के धार के शासक) की पुत्री
मूल मंदिर – आसीन्द में है। अन्य प्रमुख मंदिर – देवधाम जोधपुरिया (टोंक), देवमाली (अजमेर) तथा देव डूंगरी (चित्तौड़) ये चारों मंदिर चार धाम कहलाते हैं।
गुर्जरों के इष्ट देवता हैं। इनका मंदिर देवरा कहलाता है।
घोड़ा – लीलागर।
विष्णु के अवतार माने जाते हैं। प्रमुख मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को देवधाम जोधपुरिया में भरता है।
इनकी फड़ पर भारत सरकार के द्वारा 5 रु का टिकट भी जारी किया जा चुका है
देवनारायण जी के मंदिरों में एक ईंट की पूजा होती है।
 मल्लीनाथ जी –
जन्म – मारवाड़ में (मालाणी परगने का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया।
माता – जाणी दे।
पिता – राव तीड़ा (मारवाड़ के शासक)
पत्नी – रूपा दें
ये निर्गुण एवं निराकार ईश्वर में विश्वास रखते थे।
प्रमुख मनिदर – तिलवाड़ा (बाड़मेर) में है। यहाँ चैत्र माह में मल्लीनाथ पशु मेला भरता है।
इन्होंने निजामुदीन को पराजित किया था।
 तल्लीनाथ जी – 
मारवाड़ के वीरमदेव राठौड़ के पुत्र थे। गुरू जालधंर नाथ ने तल्लीनाथ नाम दिया।
मूल नाम – गाँगदेव राठौड़ था।
 जालौर के पाँचोड़ा गाँव में पंचमुख पहाड़ पर इनकी अश्वारोही मूर्ति है। यह क्षेत्र ओरण कहलाता है। यहाँ से कोइ भी पेड़- पौधे नहीं काटता। इन्हें प्रकृति प्रेमी देवता के रूप में पूजा जाता है।
तल्लीनाथ जी ने शेरगढ (जोधपुर) ढिकान पर शासन किया

वीरकल्लाजी – 
जन्म – मेड़ता में।
मीरा बाई के भतीजे थे।
 केहर, कल्याण, कमधज, योगी, बाल ब्रह्राचारी तथा  चार हाथों वाले देवता के रूप में पूज्य।
शेषनाग के अवतार माने जाते हैं।
अकबर से युद्ध किया था तथा वीरगति को प्राप्त।
गुरू – जालन्धरनाथ थे।
बाँसवाड़ा जिले में अत्यधिक मान्यता है।
इनकी सिद्ध पीठ – रानेला में हैं। इन्हें जड़ी-बूटी द्वारा असाध्य रोगों के इलाज का ज्ञान था।
 वीर बिग्गाजी – वीर बग्गा जी
जन्म – जांगल प्रदेश (वर्तमान बीकानेर)
पिता – राव महन
माता – सुल्तानी देवी
जाखड़ जाटों के लोकदेवता तथा कुल देवता।
मुसिलम लुटेरों से गौरक्षार्थ प्राणोत्सर्ग


देव बाबा –
मेवात (पूर्वी क्षेत्र) में ग्वालों के देवता के रूप में प्रसिद्ध। 
पशु चिकित्सा शास्त्र में निपुण थे।
ये गुर्जर जाति के आराध्य देव है
उपनाम -ग्वालों का पालन हारा।
प्रमुख मंदिर – नंगला जहाज (भरतपुर) में भाद्रपद में तथा चैत्र में मेला।
 हरिराम बाबा –
जन्म – झोरड़ा (नागौर), प्रमुख मंदिर भी यहीं हैं। बजरंग बली के भक्त थे।
पिता – रामनारायण
माता – चनणी देवी
इनके मनिदर में साँप की बाम्बी की पूजा की जाती है।
झरड़ाजी (रूपनाथजी) –
पाबूजी के बड़े भार्इ बूढ़ोजी के पुत्र थे। 
इन्होंने अपने पिता व चाचा के हत्यारे खींची को मारा।
इन्हें हिमाचल प्रदेश में बाबा बालकनाथ के रूप में पूजा जाता है।
 इनको रूपनाथ तथा बूढ़ो झरड़ा भी कहते हैं।
कोलू (जोधपुर) तथा सिंमूदड़ा (बीकानेर) में इनके मनिदर है।
 मामाजी (मामादेव) –
 राजस्थान में जब कोई राजपूत योद्धा लोक कल्याणकारी कार्य हेतु वीरगति को प्राप्त होता था तो उस विशेष
योद्धा (मामाजी) के रूप में पूजा जाता है।
पशिचम राज. में ऐसे अनेक मामाजी हैं जैसे
– धोणेरी वीर, बाण्डी वाले मामाजी, सोनगरा मामाजी आदि। इन्हें बरसात का देवता भी माना जाता है।
इनकी मूर्तियां जालौर के कुम्हार बनाते हैं, जिन्हें मामाजी के घोड़े कहते हैं।
 भूरिया बाबा (गौतमेश्वर) –
 राज्य के दक्षिण-पशिचम गोंडवाड क्षेत्र में मीणा जनजाति के आराध्य देव हैं। इनका मंदिर पोसालियां (सिरोही) में जवाई नदी के किनारे हैं।
बाबा झुँझार जी –
 जन्म – इमलोहा (सीकर) राजपूत परिवार में स्यालोदड़ा में रामनवमी पर मेला भरता है। मुसिलमों से गौरक्षार्थ बलिदान।
पनराज जी – 
जन्म – नगा (जैसलमेर)
पनराजसर में मेला भरता है। गौरक्षार्थ बलिदान।


 फत्ताजी –
 सांथू (जालौर) में जन्म। प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल नवमी को मेला।
इलोजी – 
होलिका के प्रेमी, मारवाड़ में अत्यधिक पूज्य। अविवाहित लोगों द्वारा पूजने पर विवाह हो जाता है।
आलमजी – 
बाड़मेर के मालाणी परगने में पूज्य। डागी नामक टीला आलमजी का धोरा कहलाता है। यहाँ भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को मेला भरता है।
 डूंगजी –
 जवारजी – शेखावाटी क्षेत्र के देशभक्त लोकदेवता।
भोमिया जी –
 भूमिरक्षक देवता के रूप में पूज्य।
केसरिया कुँवर जी – 
गोगाजी के पुत्र, सर्प देवता के रूप में पूज्य।





                                               SOME IMPORTANT QUESTION

1) जिला जिसमे लोक देवता रामदेव की समाधि अवस्थित है
Answer :-) जैसलमेर
) पाबूजी को अवतार माना जाता है
Answer :-) लक्ष्मण
3) सुगन चिड़ी को किस लोकमाता का स्वरूप माना जाता है
Answer :-) आयड़ माता
4) जाहरपीर के नाम से कौनसे लोक देवता के नाम से जाना जाता है
Answer :-) गोगा जी
5) राजस्थान के लोक देवता हड़भूजी का जन्म हुआ
Answer :-) नागौर
6) जाभोजी का जन्म स्थान कौन सा है
Answer :-) पीपासर
7) लोक देवी शितला माता का वाहन है
Answer :-) गधा
8) तेजाजी के जन्म स्थान का नाम है
Answer :) खरनाल
9) लोक देवता तेजाजी महाराज का पवित्र तीर्थ स्थल बांसी दुगारी कहां स्थित है
Answer :-) बूँदी
10) करोली क्षेत्र में कैला देवी की आराधना में गाए जाने वाला गीत है
Answer :-) लंगुरिया
11) राजस्थान के किस लोक देवता का संबंध कोलू गांव से है
Answer :-) गोगाजी
12) डाली बाई सुगना बाई किसके शिष्य थे
Answer :-) रामदेव जी
13) तेजाजी धाम सुरसरा किस जिले में स्थित है
Answer :-) अजमेर
14) गणगौर पर किस देवी देवता का पूजन होता है
Answer :-) शिव -पार्वती
15) चूहों वाली देवी के नाम से विख्यात लोक देवी है
Answer :-) करणी माता
16) कंठेसरी माता किसकी लोक देवी मानी जाती है
Answer :-) आदिवासीयों
17) रामदेव जी के घोड़े का रंग कैसा है
Answer :-) नीला
18) लोक देवता गोगाजी का थान सामान्यता किस पेड़ के नीचे बनाया जाता है
Answer :-) खेजड़ी
19) राजस्थान में सर्वाधिक महत्वपूर्ण लोक देवता माने जाते हैं
Answer :-) तेजाजी
20) बाण माता कुलदेवी की आराधना होती है
Answer :-) मेवाड़

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