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Rajasthan आभूषण Gk, rajasthan aabhusan gk in hindi,rajasthan aabhusan gk notes tricks in hindi

 Rajasthan आभूषण राजस्थानी आभूषण सिर के प्रमुख  आभूषण  .शीशफूल  *. रखडी (राखड़ी)  * बोर  * टिकड़ा  *. मेमन्द    माथा/ मस्तक के प्रमुख  आभूषण  बोरला  * टीका  * मांग टीका/सुरमांग  * दामिनी  * सांकली  * फीणी  * टिडी भलको  * बिन्दी  * ताविद  नाक के  प्रमुख आभूषण   बेसरि / बसेरी  * नथ(भवर कड़ी)  * चोप  * लोंग  * चूनी  * लटकन  * वारी  * नथ  * बुलाक कान के  प्रमुख आभूषण   झुमका  * टाॅप्स  * कर्णफूल/कुंडल/कुंतक/कुंतल  * सुरलिया  * भूचारिया  * टोटी  * पाटी सूलिया  * बाली  * ओगणिया  * मोरफवर   मुरकी  * तिमनिया  * दामना *  झेला * झमेला * लटकन * अगोटया *. बाली *. पिपली पत्र *. गुरड़े   दांत के प्रमुख  आभूषण   रखन  * चूप   गले के प्रमुख आभूषण   झालर         * कंठी          ...

Rajasthan लोक नृत्य GK,rajasthan loknartay,rajasthan gk notes in hindi

 Rajasthan लोक नृत्य राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य के  गैर -  होली के अवसर पर भील पुरूषों द्वारा वृताकार रूप में हाथों में डंडे लेकर किया जाता है।  अग्नि -  जसनाथी सम्प्रदाय का प्रमुख नृत्य।  यह नृत्य जलते अंगारों पर किया जाता है। डांडिया -  मारवाड़ का प्रमुख नृत्य। घूमर -  यह एक सामाजिक नृत्य है जो नृत्यों का सिरमौर कहलाता है।  यह एक स्त्री नृत्य है जो समूहों में स्त्रियों द्वारा किया जाता है।  गींदड़ - यह पुरूषों का सामूहिक नृत्य है जो हाथों में डंडे लेकर किया जाता है।  इस नृतय में पुरूष स्त्रियों का स्वांग भरते है।  ढोल -  विवाह के अवसर पर पुरूषों द्वारा मुंह में तलवार रखकर किया जाता है।  तेरहताली –  कामड़ जाति के पुरूष व महिलाओं द्वारा किया जाता है।  इस नृत्य में पुरूष गीत गाते है।  यह नृत्य रामदेव जी की अराधना में भजन गाते हुये किया जाता है।  इस नृत्य मे स्त्रियां हाथ पैर मंे मंझीरें बांधती है।  भवाई -  इस नृत्य में स्त्री व पुरूष दोनों भाग लेते है।  इसमें नर्तक सिर पर सात आठ मटके...

Rajasthan देवी देवता GK, rajasthan devi devta,rajasthan devi devta gk notes in hindi,rajasthan devi devta gk tricks

 Rajasthan देवी देवता GK राजस्थान लोक देवता एवं देवियाँ  मारवाड़ के पंच वीर –   1. रामदेवजी               2. पाबूजी            3. हड़बूजी                     4. मेहाजी मांगलिया               5. गोगाजी रामदेवजी उपनाम – रामसापीर, रूणेचा के धणी, बाबा रामदेव जन्म – उडूकासमीर (बाड़मेर), 1405 ई.  रामदेव जी तवंर वंशीय राजपूत थे। पिता – अजमाल जी तँवर (रूणेचा के ठाकुर) माता – मैणादे पत्नी – नेतलदे घोड़े का नाम – लीला इसीलिए इन्हें लाली रा असवार कहते हैं। गुरू – बालीनाथ या बालकनाथ विशेषताएँ – भैरव नामक राक्षस को मारा तथा पोकरण कस्बे को बसाया, कामडिया पंथ की स्थापना की, अछूत मेघवाल जाति की डालीबाई को बहिन माना, मुस्लिम रामसापीर की तरह पूजते हैं। रामदेव जी का प्रतीक चिन्ह पगल्ये कहलाते है। नेजा – रामदेवजी के मन्दिर की पंचरंगी ध्वजा। जम्मा – रामदेवजी का जागरण। चैबीस बाणियाँ – रामदेवजी की रचना। रिखिया – रामदेवजी क...

Rajasthan रीति रिवाज GK,rajasthan culture,rajasthan culture gk notes,rajasthan gk

 Rajasthan रीति रिवाज  GK,Rajasthan culture राजस्थान के प्रमुख रीति रिवाज * आठवाँ पूजन: - स्त्री के गर्भवती होने के सात माह पूरे कर लेती हैजब आठवाँ मास लगता है, तो आठवाँ माह में पूजन किया जाता  तब   इष्ट देव का पूजन किया जाता है और प्रीतिभोज किया जाता है। * नामकरण:- - जन्म के पश्चात् बालक नामकरण निकालना। नामकरण किसी ज्योतिशी से निकालवाया जाता हैं। *पनघट पूजन या जलमा पूजन  - बच्चे के जन्म के कुछ दिनों पश्चात् (सवा माह बाद) पनघट पूजन या कुआँ पूजन की रस्म की जाती है  *आख्या - बालक के जन्म के आठवें दिन बहनें जच्चा को आख्या करती है और एक मांगलिक चिह्न साथिया भेंट करती है। *जडूला उतारना - जब बालक दो या तीन वर्ष का हो जाता है तो उसके बाल उतराए जाते हैं। वस्तुतः मुंडन संस्कार को ही जडूला कहते हैं। *दशोटनः- -छठे मास में बच्चे को पहली बार अन्न का आहार देने कि क्रिया को कहते हैं। *सगाई - वधू पक्ष की ओर से संबंध तय होने पर सामर्थ्य अनुसार शगुन के रुपये तथा नारियल दिया जाता है। *बिनौरा - सगे संबंधी व गाँव के अन्य लोग अपने घरों में वर या वधू तथा उसके प...